तीनों सही हैं। एक ही 31 मार्च के लिए रिज़र्व बैंक, आंध्र प्रदेश की अपनी बजट बहियां और देश का ऑडिटर — तीनों अपना-अपना कुल छापते हैं, और तीनों की गिनती में चीज़ें अलग-अलग शामिल होती हैं, इसलिए आंकड़े अलग निकलते हैं। दो लोग आधिकारिक आंकड़े ही बताते हुए भी अलग-अलग बात कह सकते हैं — इसमें कोई चालाकी नहीं है, रिकॉर्ड इसी तरह रखा जाता है।
चार समूहों में नौ सवाल। बाकी एक क्लिक की दूरी पर रहते हैं।