दो चीज़ें। एक, सरकारी निगमों के ज़रिए लिया गया उधार, जिसे चुकाना राज्य को ही है पर जो मुख्य कर्ज़-आंकड़े में कभी नहीं आता। दूसरी, गारंटियां — जो तब तक कर्ज़ नहीं हैं जब तक उधार लेने वाला चुकाता रहे; और जिस दिन वह नहीं चुका पाया, वे कर्ज़ हैं।
चार समूहों में नौ सवाल। बाकी एक क्लिक की दूरी पर रहते हैं।